सरदार पंछी(जन्म)14 अक्तूबर
सरदार पंछी
मूल नाम :करनैल सिंह
पंजाबी, उर्दू और हिंदी के कवि हैं। सरदार पंछी उनका कलम नाम है। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए कई गाने लिखे हैं। उनमें से उल्लेखनीय "एक चादर मैली सी" और "वारिस" हैं।
🎂 जन्म: 14 अक्तूबर 1932
उनका पालन-पोषण ब्रिटिश पंजाब (अब पाकिस्तान में) गुजरांवाला के पास एक गाँव में हुआ। वह 17 साल के थे जब भारत का विभाजन हुआ और उन्हें और उनके परिवार को भारत आना पड़ा
🌹उन का साहित्य
सरदार पंछी ने पंजाबी में सात, उर्दू में नौ और हिंदी में दो किताबें लिखी हैं।
मज़दूर की आवाज़
सांवले सूरज
सूरज के साखे ( आईएसबीएन 9788178833163 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
अधूरा लेकिन
दर्द का तर्जुमा
तुर्के तुर्के अयाना ( आईएसबीएन 9788178834351 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
वंझली दे सूर
शिवरंजनी
नकाश-ए-कदम
मेरी नज़र में आप
उजालों के हमसफर
गुलिस्तान-ए-अक़ीदत
बोस्टन-ए-अक़ीदत
पंछी दी परवाज़
कदम कदम तन्हाई ( आईएसबीएन 9788178833903 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
सरदार पंछी की ग़ज़लें
🌹हर मौसम बरसात का मौसम
सरदार पंछी🌹
हर मौसम बरसात का मौसम
बे-क़ाबू जज़्बात का मौसम
मेरी बाँसुरी उस के लबों पर
हो तो हो नग़्मात का मौसम
बात पते की कह जाता है
बात बात में बात का मौसम
कोई मूर्ती बन जाएगी
आया है हिम-पात का मौसम
कोरे काग़ज़ पर लिक्खा है
होंटों की हरकात का मौसम
हम चाहें तो आ सकता है
वो शीरीं कलमात का मौसम
तिरे बिन जीवन है जैसे
बिन बादल बरसात का मौसम
ख़ुश्क लबों से कुछ कहता है
भीगी भीगी रात का मौसम
मेरा रिश्ते-दार हुआ है
मेरे दर्द की ज़ात का मौसम
आँसू को भी पानी कर दे
आँखों के हालात का मौसम
बाँट रहे गुल महक तबस्सुम
फिर आया ख़ैरात का मौसम
आँखें बंद करूँ तो देखूँ
एक नज़र में घात का मौसम
है शतरंज ही जीवन अपना
पै-दर-पै शह मात का मौसम
आने वाला है आएगा
मेरे घर बर्कात का मौसम
नहीं बदलता नहीं बदलता
इंसाँ की आदात का मौसम
ज़ख़्म-ए-दिल को सहलाता है
नर्म नर्म उस हाथ का मौसम
तुम जो आँख उठा कर देखो
रात में हो बरसात का मौसम
हर तितली के ख़्वाब में आए
फूलों की बरसात का मौसम
हम से पूछो क्या होता है
इंसानी आफ़ात का मौसम
बिन पूछे क्यों आ जाता है
तल्ख़ तल्ख़ सी बात का मौसम
चाँद की किरनें ले आती हैं
दिल से दिल की बात का मौसम
फिर फिर याद आता है 'पंछी'
गुज़र गए लम्हात का मौसम
🌹जो राहों के पत्थर थे क्या हो गए हैं🌹
सरदार पंछी
जो राहों के पत्थर थे क्या हो गए हैं
शिवालों में जा कर ख़ुदा हो गए हैं
🌹क्या है इस दिल का हाल मत पूछो🌹
सरदार पंछी
क्या है इस दिल का हाल मत पूछो
हम से नाज़ुक सवाल मत पूछो
जान जाएगा कुल ज़माना सब
ज़िंदगी है मुहाल मत पूछो
शाइ'री और अदब की दुनिया में
कौन है बा-कमाल मत पूछो
हम को देना सुबूत है फ़न का
ख़ूँ में है क्या उबाल मत पूछो
शोहरतें किस तरह की मेरे लिए
ले के आया ये साल मत पूछो
वक़्त इक दिन बदल के रख देगा
उस की हर एक चाल मत पूछो
पढ़ रहा हूँ ग़ज़ल समझ लेना
है ये किस का ख़याल मत पूछो
हुब्ब-ए-याराँ मिरा ख़ज़ाना है
उस में कितना मनाल मत पूछो
कैसे हैं बाल-ओ-पर ये 'पंछी' के
कैसे हैं ख़द्द-ओ-ख़ाल मत पूछो
ये कैसी हुआ चल रही है चमन में
कि शाख़ों से पत्ते जुदा हो गए हैं
जो कल तक थे क़ातिल वो गंगा नहा कर
सुना है कि अब देवता हो गए हैं
वो शाख़ें बहाएँ न क्यूँ ख़ूँ के आँसू
हरे पत्ते जिन से जुदा हो गए हैं
बताए हमें बाग़बाँ कि ये 'पंछी'
नशेमन से क्यूँ लापता हो गए हैं
मूल नाम :करनैल सिंह
पंजाबी, उर्दू और हिंदी के कवि हैं। सरदार पंछी उनका कलम नाम है। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए कई गाने लिखे हैं। उनमें से उल्लेखनीय "एक चादर मैली सी" और "वारिस" हैं।
🎂 जन्म: 14 अक्तूबर 1932
उनका पालन-पोषण ब्रिटिश पंजाब (अब पाकिस्तान में) गुजरांवाला के पास एक गाँव में हुआ। वह 17 साल के थे जब भारत का विभाजन हुआ और उन्हें और उनके परिवार को भारत आना पड़ा
🌹उन का साहित्य
सरदार पंछी ने पंजाबी में सात, उर्दू में नौ और हिंदी में दो किताबें लिखी हैं।
मज़दूर की आवाज़
सांवले सूरज
सूरज के साखे ( आईएसबीएन 9788178833163 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
अधूरा लेकिन
दर्द का तर्जुमा
तुर्के तुर्के अयाना ( आईएसबीएन 9788178834351 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
वंझली दे सूर
शिवरंजनी
नकाश-ए-कदम
मेरी नज़र में आप
उजालों के हमसफर
गुलिस्तान-ए-अक़ीदत
बोस्टन-ए-अक़ीदत
पंछी दी परवाज़
कदम कदम तन्हाई ( आईएसबीएन 9788178833903 , प्रकाशक:चेतना प्रकाशन)
सरदार पंछी की ग़ज़लें
🌹हर मौसम बरसात का मौसम
सरदार पंछी🌹
हर मौसम बरसात का मौसम
बे-क़ाबू जज़्बात का मौसम
मेरी बाँसुरी उस के लबों पर
हो तो हो नग़्मात का मौसम
बात पते की कह जाता है
बात बात में बात का मौसम
कोई मूर्ती बन जाएगी
आया है हिम-पात का मौसम
कोरे काग़ज़ पर लिक्खा है
होंटों की हरकात का मौसम
हम चाहें तो आ सकता है
वो शीरीं कलमात का मौसम
तिरे बिन जीवन है जैसे
बिन बादल बरसात का मौसम
ख़ुश्क लबों से कुछ कहता है
भीगी भीगी रात का मौसम
मेरा रिश्ते-दार हुआ है
मेरे दर्द की ज़ात का मौसम
आँसू को भी पानी कर दे
आँखों के हालात का मौसम
बाँट रहे गुल महक तबस्सुम
फिर आया ख़ैरात का मौसम
आँखें बंद करूँ तो देखूँ
एक नज़र में घात का मौसम
है शतरंज ही जीवन अपना
पै-दर-पै शह मात का मौसम
आने वाला है आएगा
मेरे घर बर्कात का मौसम
नहीं बदलता नहीं बदलता
इंसाँ की आदात का मौसम
ज़ख़्म-ए-दिल को सहलाता है
नर्म नर्म उस हाथ का मौसम
तुम जो आँख उठा कर देखो
रात में हो बरसात का मौसम
हर तितली के ख़्वाब में आए
फूलों की बरसात का मौसम
हम से पूछो क्या होता है
इंसानी आफ़ात का मौसम
बिन पूछे क्यों आ जाता है
तल्ख़ तल्ख़ सी बात का मौसम
चाँद की किरनें ले आती हैं
दिल से दिल की बात का मौसम
फिर फिर याद आता है 'पंछी'
गुज़र गए लम्हात का मौसम
🌹जो राहों के पत्थर थे क्या हो गए हैं🌹
सरदार पंछी
जो राहों के पत्थर थे क्या हो गए हैं
शिवालों में जा कर ख़ुदा हो गए हैं
🌹क्या है इस दिल का हाल मत पूछो🌹
सरदार पंछी
क्या है इस दिल का हाल मत पूछो
हम से नाज़ुक सवाल मत पूछो
जान जाएगा कुल ज़माना सब
ज़िंदगी है मुहाल मत पूछो
शाइ'री और अदब की दुनिया में
कौन है बा-कमाल मत पूछो
हम को देना सुबूत है फ़न का
ख़ूँ में है क्या उबाल मत पूछो
शोहरतें किस तरह की मेरे लिए
ले के आया ये साल मत पूछो
वक़्त इक दिन बदल के रख देगा
उस की हर एक चाल मत पूछो
पढ़ रहा हूँ ग़ज़ल समझ लेना
है ये किस का ख़याल मत पूछो
हुब्ब-ए-याराँ मिरा ख़ज़ाना है
उस में कितना मनाल मत पूछो
कैसे हैं बाल-ओ-पर ये 'पंछी' के
कैसे हैं ख़द्द-ओ-ख़ाल मत पूछो
ये कैसी हुआ चल रही है चमन में
कि शाख़ों से पत्ते जुदा हो गए हैं
जो कल तक थे क़ातिल वो गंगा नहा कर
सुना है कि अब देवता हो गए हैं
वो शाख़ें बहाएँ न क्यूँ ख़ूँ के आँसू
हरे पत्ते जिन से जुदा हो गए हैं
बताए हमें बाग़बाँ कि ये 'पंछी'
नशेमन से क्यूँ लापता हो गए हैं
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